150 वर्ष पूर्व हुई थी महादेव के मंदिर की खोज, दिन में 2 बार दर्शन देकर समुद्र में गायब हो जाता है

भारत में ऐसे अनेक पुरानी और चमत्कारी मंदिर हैं, जो अपनी खासियतों के लिए दुनिया भर में जाने जाते हैं। आपने शिव जी से जुड़े हुए कई चमत्कारों के बारे में सुना होगा। शिव जी के चमत्कार से जुड़ा एक मंदिर गुजरात में भी है। आइए हम उसके बारे में आपको बताते हैं।
शिव का यह अद्भुत मंदिर गुजरात के कैम्बे तट पर है। यह चमत्‍कारी मंदिर दिन में दो बार (सुबह और शाम) समुद्र में डूब जाता है और फिर प्रकट हो जाता है। यह मंदिर स्तंभेश्वर महादेव मंदिर के नाम से जाना जाता है। यह मंदिर समुद्र की लहरों में अपने आप ही गायब हो जाता है और कुछ देर बाद फिर से बाहर निकल आता है। ऐसा दिन में केवल दो बार ही होता है।
यह मंदिर समुद्र के जिस किनारे पर है उसमें दो बार ज्वार-भाटा आता है। इस कारण से समुद्र का पानी मंदिर में आकर शिवलिंग का दो बार अभिषेक कर वापस लौट जाता है। इस दौरान वहां पर किसी को भी जाने की अनुमति नहीं होती है।
स्तंभेश्वर महादेव मंदिर तकरीबन 150 साल पुराना है और मंदिर में स्थापित शिवलिंग 4 फीट ऊंचा है। कहा जाता है कि इस अद्भुत मंदिर का निर्माण स्वयं शिव जी के पुत्र कार्तिकेय ने किया है। जब उनके द्वारा शिव के बड़े भक्त का वध हो जाता है तब उसकी गलती की माफी मांगने के लिए कार्तिकेय ने यह मंदिर बनवाया था।