एक मोटरसाइकिल की कीमत के बदले कैसे लोगों ने गंवाईं अपनी जमा पूंजी, जानिए क्या है 600 करोड़ की हेरा-फेरी

देश में धोखाधड़ी करने का एक रिवाज़ सा बन गया है. आए दिन कोई न कोई फ्रोड करने का मामला सामने आ रहा है. नीरव मोदी स्कैम केस हो या विजय माल्या का फ्रोड मामला भुगतना तो आम आदमी को ही पड़ता है.  कुछ ऐसा ही फ्रोड का मामला एक बार फिर देखने को मिला जहां एक मोटरसाइकिल की कीमत जमा कराएं और बदले में पाएं दोगुना पैसा पाएं. 
ये है वे फर्जी विज्ञापन जिसे  राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की एक कंपनी ने दिखाया और कई लोग इसके जाल में फंस कर अपनी मेहनत की पूंजी गंवा बैठे. लाखों कमाने का सपना जब टूटा तब सामने आया कि कमाना तो दूर, जो पैसा अपना था, वो भी चला गया गर्वित इन्नोवेटर्स प्रमोटर्स लिमिटेड की धोखाधड़ी स्कीम में. आइए जानते है क्या था पूरा मामला.

निवेशकों का ध्यान आकर्षित करने के लिए लांच की गई ये स्कीम
कंपनी ने सोशल मीडिया के माध्यम से कम वक्त में ज्यादा पैसा कमाने की इच्छा रखने वाले महत्वाकांक्षी युवाओं को निशाना बनाया. इस दौरान मेडिकल रिप्रजेंटेटिव (एमआर), टेलीकॉम सेक्टर में कार्यरत पेशेवर, युवा व्यवसायी और यहां तक कि युवा सैनिक भी कंपनी की ललचाने वाली योजनाओं का शिकार बन गए.कंपनी के कर्मियों ने व्हाट्सएप ग्रुप्स बनाकर कंपनी की ‘आकर्षक योजनाएं’ फैलानी शुरू कर दीं. योजना में वादा किया जाता था कि एक मोटरसाइकिल की कीमत के 62,100 रुपये जमा कराने पर निवेशक को एक वर्ष तक 9,765 रुपये प्रति माह वापस मिलेंगे, 
वहीं अगर एक साथ तीन बाइक की कीमत के 1,86,300 रुपये जमा करने पर एक साल तक 33,885 रुपये प्रतिमाह और पांच बाइकों की कीमत (3,10,500 रुपये) जमा करने पर निवेशक को एक वर्ष तक 58,005 रुपये प्रति माह वापस मिलेंगे. इसके अतिरिक्त सात बाइकों और नौ बाइकों के लिए रुपये जमा कराने पर उसी अनुपात में धन देने की योजना पेश की गई थी.कंपनी ने निवेशकों को भरोसा दिलाने के लिए शुरुआत में उनके खाते में किस्त भेजनी शुरू की,किन्तु बाद में किस्त बंद कर दी गई. कंपनी ने लोगों को निशाना बनाने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया.

कंपनी के मालिक ने किया सरेंडर
कंपनी के मालिक संजय भाटी ने इसी महीने अदालत में आत्मसमर्पण किया और कंपनी के निदेशक विजय पाल सिंह कसाना को छह जून को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। शुक्रवार 21 जून को हुई प्रेस कान्फ्रेंस में एसएसपी वैभव कृष्ण ने कहा कि बाइक बोट कंपनी पर अब तक 37 मामले दर्ज हो चुके हैं. कंपनी का मालिक संजय भाटी और विजयपाल कसाना को रिमांड पर लेकर पूछताछ करने के बाद दादरी क्षेत्र के कोट गांव स्थित दफ्तर से कुल 102 मोटर साइकिल, 27 कारें ,कई जले हुए कम्प्यूटर्स, फर्जी चेक बुक बरामद की गई हैं. 

इनकी कीमत तकरीबन आठ करोड़ 75 लाख रुपये है. पूछताछ में यह भी पता चला कि दिसंबर-2018 तक कंपनी ने 2.25 लाख निवेशकों की आईडी एक्टीवेट की जा चुकी है. शुरुआती जांच के बाद यह अनुमान लगाया गया है कि कंपनी ने निवेशकों से तकरीबन1500 करोड़ रुपये की ठगी की है.

दूसरी कंपनी में डाले छह सौ करोड़ रुपये
गर्वित इनोवेटिव प्रमोटर्स लिमिटेड यानि बाइक बोट (Bike Boat) ने अब तक तकरीबन 650 करोड़ रुपये दूसरी कंपनी को डायवर्ट किया है. यह जानकारी एसपी ग्रामीण विनीत जायसवाल के नेतृत्व में गठित एसआईटी को शुरुआती जांच में मिली है. एसआईटी ने कंपनी के उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में खोले गए लगभग दो दर्जन बैंक खातों को फ्रीज किया है. उसके बारे में और जानकारी जुटाई जा रही है.
एसएसपी वैभव कृष्ण ने शुक्रवार को कहा कि अबतक जांच में तकरीबन डेढ़ हजार करोड़ रुपये का फर्जीवाड़ा होना प्रतीत हो रहा है. एसआइटी की जांच में अब तक 17 बैंक खातों का प्रयोग होने की जानकारी मिली है. उन सभी बैंक खातों की जांच कराई गई, किन्तु उन खाते में कोई विशेष रकम नहीं मिली. करीब छह सौ करोड़ रुपये दूसरी कंपनी में डायवर्ट करने की जानकारी एसआइटी को मिली है. बाइक कंपनी के निदेशकों ने चेक व अन्य तरीके से बड़े स्तर पर लग्जरी वाहन भी खरीदे हैं.

जानिए कौन है इस स्कैम का मास्टरमाइंड
1998 में काशीपुर से केमिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा कर चुके संजय भाटी ने साल 2010 में ही गर्वित इनोवेटव प्रमोटर्स लिमिटेड (GIPL) की शुरुआत की थी. चीती गांव में सबसे पहला इसका दफ्तर बनाया गया था। वर्ष 2017 में गैंग ने मोटरसाइकिल बोट स्कीम पहली बार लांच की थी व उसका दूसरा दफ्तर नोएडा सेक्टर-15 में खुला था.