आखिर किसके खाते में जाता है ये ट्रैफिक चालान का पूरा पैसा…जानिए क्या है इसका पूरा खेल

भारत सरकार ने सड़क सुरक्षा को लेकर नए ट्रेफिक नियम को लागु किया हैं. वहीं ये नियम देश एन सभी को उसका पालन करना अनिवार्य माना जाएगा . लेकिन अगर इस नियम का उल्लंघन किया तो उसके खिलाफ कठोर  कार्यवाई कि जाएगी. लेकिन क्या कभी अपने सोचा हैं ये चालान की राशी आखिर किसके पास जाती हैं. खबरों के मुताबिक कई बार ऐसा होता है कि चालान की राशि अदालत में जमा की जाती है तो ऐसी परिस्थिति में क्‍या होता है? यह सवाल जब हमने पटना हाईकोर्ट के सीनियर वकील धीरेंद्र कुमार से पूछा तो उन्‍होंने बताया हैं कि ऐसी स्थिति में भी चालान की राशि राज्‍य सरकार को ही जाती है.

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लेकिन दिल्‍ली समेत अन्‍य केंद्र शासित राज्‍यों में यह पैमाना बदल जाता है.” धीरेंद्र कुमार के मुताबिक अगर दिल्‍ली में ट्रैफिक पुलिस चालान काटती है तो वह राशि केंद्र सरकार के खाते में जाएगी. इसी तरह अगर स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी ने चालान काटा है तो यह राशि दिल्‍ली सरकार के खाते में जाएगी क्‍योंकि राज्‍य का परिवहन विभाग दिल्‍ली सरकार के अधीन आता है. जहां अगर नेशनल हाईवे पर चालान कटता है तो ऐसी स्थिति में जुर्माने की राशि केंद्र और राज्‍य सरकार के बीच बंट जाती है. वहीं स्‍टेट हाईवे पर कटने वाले चालान की राशि राज्‍य सरकार के खाते में जाती है. वहीं दिल्‍ली के मामले में एक बार फिर यह देखा जाता है कि चालान काटने वाली ट्रैफिक पुलिस है या स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी. 
दिल्‍ली के ट्रांसपोर्ट सिस्‍टम को लेकर राज्‍य सरकार को सुझाव देने वाले वर्ल्ड रिसोर्स इंस्टिट्यूट (WRI) के डायरेक्टर माधव पाई ने बताया कि कई बार चालान राशि को सेफ्टी फंड बनाकर कलेक्‍ट किया जाता है. बीते 12 सितंबर को सबसे बड़ा चालान दिल्‍ली में एक ट्रक का कटा है. इस ट्रक के चालान की जुर्माना राशि थी 2,00, 500 रुपये है. यह चालान दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने मुकरबा चौक पर काटा था. ओवरलोडिंग में काटे गए इस चालान की जुर्माना राशि ट्रक मालिक द्वारा अदालत में भरी गई.
दरअसल ट्रैफिक के नए नियम और चालान की राशि हर राज्‍य में एक जैसी हो, ये जरूरी नहीं है. अगर राज्‍य चाहें तो इस नियमों या चालान की राशि में राहत दे सकते हैं. इसी के तहत गुजरात और उत्‍तराखंड जैसे राज्‍यों ने लोगों को राहत दी है. वहीं राज्‍यों के पास इस नए नियम को खारिज करने का भी अधिकार है. यही वजह है कि पश्चिम बंगाल, महाराष्‍ट्र समेत कई बड़े राज्‍यों में ट्रैफिक के नए नियम नहीं लागू हैं.