हेलमेट नहीं पहनने पर काट दिया बस चालक का चालान, ड्राइवर ने कहा- ‘कोर्ट जाऊंगा और फिर…’

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने हाल में ही सदन में संशोधित मोटर व्हीकल एक्ट पारित कराया है, जिसके बाद से ही पूरे देश में ट्रैफिक नियम तोड़ने पर सख्ती से चालान वसूला जा रहा है। इस मामले को लेकर आए दिन मीडिया में तरह तरह की खबरें सामने आ रही हैं, जिससे पूरे देश में बवाल मचा हुआ। मोदी सरकार के इस बिल का विरोध करते हुए दिल्ली एनसीआर में कैब और ऑटो वालों ने जमकर हड़ताल भी किया, लेकिन इस बीच एक अजीबो गरीब मामला नोएडा से सामने आया है, जिसके बाद बवाल मचा हुआ है।
 नए मोटर व्हीकल एक्ट के तहत देश भर में सख्ती से चालान वसूला जा रहा है, जिसकी वजह से कई लोग इसका विरोध कर रहे हैं। इसी सिलसिले में पुलिस वालों पर मनमानी का भी आरोप लगाया जा रहा है। दरअसल, नोएडा के निजी बस चालक का आरोप है कि पुलिस ने उससे हेलमेट न पहनने की वजह से चालान वसूला है, जिसकी वजह से उसने कोर्ट जाने का फैसला किया है। मतलब साफ है कि बस चालक ने नोएडा पुलिस पर हेलमेट न पहनने पर मनमानी चालान वसूलने का आरोप लगाया है।

हेलमेट न पहनने पर कटा चालान
निजी बस के मालिक ने कहा कि हेलमेट न पहनने पर पुलिस ने 500 रुपये का चालान काटा, जोकि ऑनलाइन काटा गया। बता दें कि बस मालिक निरंकार सिंह ने कहा कि 11 सितंबर को ऑनलाइन चालान किया गया था, जिसे शुक्रवार को उनके एक कर्मी ने इस चालान को देखा, जिसके बाद मैंने संबंधित अधिकारियों के सामने यह मामला रखा है। बता दें कि बस चालक हेलमेट लगाकर बस नहीं चलाते हैं, ऐसे में इस पूरे मामले को पुलिस की मनमानी के तौर पर देखा जा रहा है।

ज़रूरत पड़ने पर कोर्ट तक जाऊंगा
बस के मालिक निरंकार सिंह ने कहा कि अभी तो मैंने यह मामला संबंधित अधिकारियों के सामने रखा है, लेकिन अगर वहां से मुझे न्याय नहीं मिला तो मैं सीधा कोर्ट जाऊंगा और फिर इस चालान के खिलाफ केस दर्ज कराऊंगा, क्योंकि यह पुलिस की मनमानी है। हालांकि, इस पूरे मामले अधिकारियों ने कहा कि अगर कोई गलती हुई है तो इसे जल्द ही सुधारा जाएगा। साथ ही यह भी कहा कि यह चालान नोएडा यातायात पुलिस के द्वारा नहीं कटा है, बल्कि परिवहन विभाग ने काटा है।

जुर्माने राशि को लेकर चल रही है बहस
नए मोटर व्हीकल एक्ट के तहत भारी भरकम जुर्माने को लेकर लगातार बहस चल रही है। इस मुद्दे पर बीजेपी शासित प्रदेशों में भी अनबन दिखाई दे रही है, जिसकी वजह से इसे पूरी तरह से लागू नहीं किया गया है। हालांकि, केंद्र सरकार राज्य सरकार के दबाव में आकर अपना फैसला बदले पर बिल्कुल भी विचार नहीं कर रही है, क्योंकि इसे सड़क दुर्घटना को रोकने के लिए बनाया गया है। हालांकि, देखने वाली बात यह होगी कि यह पूरा मामला कब जाकर शांत होगा और क्या इस पर केंद्र सरकार दोबारा विचार कर सकती है या नहीं, ये तो वक्त ही बताएगा।