पढ़ने-लिखने की उम्र में शादी फिर ससुराल से परेशान, जिंदगी चलाने के बन गई ऑटो ड्राइवर

एक महिला न केवल अच्छे व बुरे दिनों को सहने की हिम्मत रखती है बल्कि अपनी किस्मत भी खुद लिख सकती हैं। जीवन में आने वाली मुसीबतों का सामना करने के बाद भी सुनीता चौधरी ने हिम्मत नही हारी। अपनी किस्मत उन्होंने खुद लिखते हुए न केवल खुद को एक मुकाम पर पहुंचाया बल्कि भारत की 100 प्रभावशाली महिलाओं की सूची में अपना नाम भी शामिल करवाया था। 
इसके साथ ही उत्तर भारत की पहली महिला ऑटो ड्राइवर होेने का गौरव भी हासिल किया। इबारत उत्तरप्रदेश के हस्तिनापुर की रहने वाली सुनीता चौधरी को अपने जीवन में इस मुकाम को हासिल करने के लिए कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ा। जब सुनीता के पढ़ने लिखने व खेलने कूदने के दिन थे उस समय परिवार के लोगों ने हरियाणा में उनकी शादी करवा दी। उसके कंधों पर जिम्मेदारियों का बोझ आ चुका था। 

दहेज के लिए ससुराल वालों ने की थी पीटाई 
शादी के बाद कुछ दिन बाद ही ससुराल के लोगों ने सुनीता को दहेज के लिए परेशान करना शुरु कर दिया था। एक बार तो ससुराल के लोगों ने सुनीता को इतना मारा की वह अधमरी हो कर बेहोश हो गई। जब उसे होश आया तो वह मौका पा कर वहां से भाग निकली व दिल्ली आ गई। 

पेट पालने के लिए लोगों के घर किया काम 
ससुराल से भागने के बाद जब सुनीता दिल्ली पहुंची तो वहां पर उसे जानने वाला कोई नही था। भूख के मारे उसका बुरा हाल था। ऐसे में सुनीता ने अपना पेट पालने के लिए न केवल लोगों के घर झाडू पोंछा लगाए बल्कि बर्तन भी मांजे। इसके बाद उन्होंने हार न मानते हुए ऑटो रिक्शा चलाने के फैसला लिया। इसके बाद सुनीता ने ऑटो चलाने का प्रशिक्षण लिया। 2004 में उन्होंने अपना खुद का ऑटो चलाना शुरु किया। 

2017 में राष्ट्रपति ने किया था सम्मानित
जब से सुनीता ऑटो चला रही है तब से वह अपनी जिंदगी बडे ही आराम से गुजार रही है। इतना ही नही 2017 में भारत की 100 शिखर महिलाओं में शामिल होने का गौरव उन्हें हासिल हुआ था। जिसके बाद उन्हें राष्ट्रपति भवन में सम्मानित किया गया था। ऑटो चलाने के साथ ही सुनीता लोगों व खास कर महिलाओं को दहेज व शारीरिक शोषण के प्रति जागरुक कर रही हैं।