बिहार के इस गाँव में पुलिस ने आजतक नहीं रखा है कदम, वजह जानकर आप भी खुश हो जाएंगे

बांका जिले के कथा शिल्पी प्रेमंचद ने कालजयी पंच परमेश्वर कहानी में आपसी विवादों को सुलझाकर लोगों को न्याय दिलाने वाले पंचों को परमेश्वर की उपाधि से नवाजा है। पंचायती राज व्यवस्था में आज भी बांका जिले के नक्सल प्रभावित बेलहर प्रखंड के जमुआ गांव के पंच परमेश्वर की भूमिका अदा कर रहे हैं। वे आपसी विवादों की सुनवाई कर लोगों को दूध का दूध और पानी का पानी सदृश्य न्याय दिला रहे हैं। इस पंचायत की वजह से ग्रामीणों को एक ओर जहां न्यायालय के खर्च से मुक्ति मिल रही है, वहीं वहां पुलिस को भी जाने की जरूरत नहीं पड़ती हैं। 
जमुआ गांव की मारपीट से लेकर जमीन व पारिवारिक विवाद तक के सारे मामले वहां की पंचायत में ही सुलझाए जा रहे हैं। इसका नतीजा यह हो रहा है कि गांव के लोगों को थाना व न्यायालय जाने की जरूरत नहीं पड़ती है। गांव के लोगों के ऐसे समझदारी पूर्ण कदम के कारण पुलिस को भी किसी विवाद को सुलझाने के लिए वहां कदम रखने की जरूरत नहीं पड़ती है। पंच परमेश्वर की भूमिका का आलम यह कि अबतक इस गांव से किसी व्यक्ति के खिलाफ एक भी हत्या, मारपीट, भूमि संबंधी विवाद आदि का मुकदमा न्यायालय में दायर नहीं हुआ है। इतना ही नहीं किसी के खिलाफ कोई प्राथमिकी भी दायर नहीं हुई है। 

पीढ़ी दर पीढ़ी चल रही परंपरा 
गांव का अधिकांश परिवार खेती-बारी से जुड़े हैं। ऐसे में यहां की पंचायत में विशेषत: भूमि एवं पारिवारिक झगड़े से जुड़े मामले ही आते हैं। पंचों द्वारा दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद उनका न्यायपूर्ण समाधान कर दिया जाता है। जानकारी के अनुसार पूर्व में यहां के रामधनी सिंह, जनार्दन सिंह, केदार सिंह, राघवेंद्र सिंह आदि सरपंचों की टीम सामूहिक तौर पर विवादित मामलों को निपटाती थी। वहीं आज नई पीढ़ी के शैलेंद्र, मिथिलेश, पंकज आदि युवाओं की टीम इस काम को आगे बढ़ा रही है। 

विद्यालय में बैठते हैं पंच परमेश्वर
युवा पंचों की टीम विवाद का निपटारा एक समिति के माध्यम से करती है। कोई मामला सामने आने पर पहले उस पक्ष से आवेदन लिया जाता है। फिर गांव के विद्यालय में बैठक कर आपसी विचार-विमर्श से उसे सुलझा लिया जाता है। दोनों पक्षों द्वारा पंच के फैसले को स्वीकार कर लिए जाने के बाद उसका लिखित कागजात तैयार किया जाता है। जरूरत पडऩे पर उसमें पंच और सरपंच को भी बुलाया जाता है।
लेकिन, किसी मामले को ग्राम कचहरी से नहीं जोड़ा जाता है। इससे जुड़े शैलेंद्र सिंह बताते हैं कि गांव में तरह तरह के विवाद होते रहते हैं। कई बार पुलिस तक जाने की भी नौबत आ जाती है। लेकिन, पंचों की यह टोली सक्रिय होकर अभी तक हर मामले को थाना पहुंचने से बचाती रही है। यहां की पंचायत व्यवस्था पर गांव वालों को गर्व है। लोग भी आर्थिक खर्च और परेशानी से बच रहे हैं।