11 माह की बच्ची ने गुड़िया देख किया जो काम, मेडिकल जगत ने किया उसको सलाम

नई दिल्ली के लोकनायक अस्पताल के ऑर्थो ब्लॉक में भर्ती 11 माह की जिकरा 17वें दिन मंगलवार को अपनी गुड़िया परी के साथ वापस घर लौट गई। यह कोई ऐसा मामला नहीं था कि मरीज को कोई बीमारी हुई और डॉक्टर ने उसे ठीक कर दिया और केस खत्म हो गया। यह चिकित्सा विज्ञान का एक ऐसा मामला था जिसमें एक गुड़िया ने बच्ची के इलाज में मदद की। बच्ची जिकरा ने जिस तरह अपनी गुड़िया को देखकर इलाज कराया उसे डॉक्टर अन्य इलाजों के लिए एक बड़ा उदाहरण मान रहे हैं। इस खबर पर अमर उजाला ने शुरुआत से विशेष कवरेज की है। पढ़िए क्या है पूरा मामला...
जिकरा 30 अगस्त को उस वक्त सोशल मीडिया पर लाखों लोगों की चहेती बन गई। अस्पताल के 16 नंबर बिस्तर पर उसके दोनों पैर रस्सी से ऊपर बंधे थे और पैरों में पट्टी थी। जिकरा के बिलकुल पास उसकी गुड़िया भी इसी स्थिति में थी। यह केस बाल मनोविज्ञान से जुड़ा होने के कारण चिकित्सा विज्ञान के लिए भी काफी अनोखा था। लोग जिकरा के जल्द से जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना करने लगे। 
बीते सोमवार ही जिकरा और उसकी गुड़िया के दोनों पैरों में पक्का प्लास्टर चढ़ाया गया। फिलहाल डॉक्टरों ने उसे दो सप्ताह के लिए घर पर आराम करने को कहा है। मंगलवार को अस्पताल के हड्ड़ी रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अजय गुप्ता और उनकी टीम ने मिलकर जिकरा को विदाई दी। हंसते-खिलखिलाते डॉक्टर, नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ जिकरा के साथ सेल्फी ले रहे थे। उसे किसी ने खिलौने तो किसी ने चॉकलेट गिफ्ट भी की।

हर काम गुड़िया के साथ करती है
जिकरा के पिता शहजाद ओखला मंडी में सब्जी विक्रेता हैं। वे परिवार के साथ दिल्ली गेट स्थित डिलाइट सिनेमा के पास रहते हैं। 17 अगस्त को जिकरा के बेड से नीचे गिरने की वजह से पैर में फ्रेक्चर आया। रोती-बिलखती मासूम को लेकर मां-बाप नजदीकी लोकनायक अस्पताल पहुंचे तो डॉक्टरों ने एक्सरे में फ्रेक्चर की पुष्टि की। बच्ची को भर्ती करना जरूरी था और दर्द से राहत देना भी। जिकरा काफी सहमी हुई थी।
डॉक्टर जैसे ही उसे छूते, वह मां की गोद में छटपटाने लगती। काफी मशक्कत के बाद भी उस पर नियंत्रण नहीं पाया जा सका तो जिकरा की मां फरीना ने डॉक्टरों से उसकी गुड़िया लाने की मंजूरी मांगी। परी नाम की यह गुड़िया जिकरा को उसकी नानी ने गिफ्ट की थी। जिकरा दूध पीने से लेकर सोने तक हर काम परी के साथ करती थी। अस्पताल में परी को देख जिकरा खिलखिला गई। यह देख हर कोई भौचक्का था।
परी की आड़ में डॉक्टरों ने इंजेक्शन तो लगा दिया, लेकिन वे जिकरा को बिस्तर पर नहीं रख पा रहे थे। तभी डॉक्टर को ख्याल आया और उन्होंने पहले गुडिय़ा को पट्टी बांधी, फिर उसके दोनों पैर रस्सी से बांधकर ऊपर लटका दिए। परी की इस स्थिति को देख जिकरा भी चुपचाप पट्टी बंधवाती गई। डॉक्टरों ने गुड़िया की तरह उसके पैरों को भी बांधकर ऊपर लटका दिया। इस बीच जिकरा न रोई, न कुछ कहा। डॉक्टरों का कहना है कि 2 साल से कम उम्र के बच्चों में हड्डी टूटने पर उन्हें इस तरह रखा जाता है, जिससे हड्डी जुड़ने में आसानी हो। जिकरा के मूवमेंट देख डॉक्टर भी दंग थे कि फ्रेक्चर के बाद भी यह बच्ची बिस्तर पर अपनी गुड़िया के साथ करवटें लेती रहती थीं।