इनके पैरों को कीड़ों ने छलनी कर दिया, खुद के घर में अकेली रहकर बना लिया नरक जैसा जीवन

गायत्री देवी के पैरों का फोटो हम इसलिए नहीं दिखा रहे कि उसे देखकर आपकी रुह कांप जाएगी। इतना दर्द कैसे सहन कर रही थी 55 वर्षीय गायत्री मां। दोनों पैरों के पंजों को कीड़ों ने छलनी कर दिया। तीन माह में इतने कीड़े हो गए कि किसी लावारिस पशु को ऐसे सड़ते नहीं देखा। खुद के घर में ही बेसुध नरक जैसा जीवन झेलती रही। परिवार तो नहीं है लेकिन, सगे भाई के वारिस भी दूर हो गए।
आखिर में नवरात्र स्थापना के दिन आसपास के लोगों की सूचना के बाद महिला की सुध अपना घर आश्रम ने ली। आश्रम के समाजसेवी सदस्य अलवर शहर में छाजू सिंह का दरवाजा के निकट खण्डहर मकान पहुंचे। वहां जिसकी भी महिला के पैरों पर नजर पड़ी तो अन्दर तक हिल गए। रूह कांप गई। कीड़े ऐसे चल रहे थे जैसे किसी गंदी जगह मक्खी भिनभिनाती हों। पूरा पंजा छलनी कर दिया। दूसरे पैर में भी कीड़े शुरू हो गए थे। नवरात्रि के दिन यहां की पार्षद कमलेश देवी को पता चला तो उन्होंने शहर विधायक के जरिए अपना घर आश्रम संस्था को सूचना भिजवाई। जो महिला को भरतपुर लेकर गए।

पीड़ा बताकर रोने लगे सचिन
आश्रम के सदस्य सचिन ने महिला को जिस हालात में देखा। उस दर्द भरी दास्तां को बताते हुए वे खुद भी अपने आंसू नहीं रोक पाए। उन्होंने बताया कि एक पैर का पंजा पूरी तरह से कीड़ों से भरा पड़ा था। ऐसी हालत थी कि कोई देख नहीं सकता था। यहां लाने के बाद आश्रम में पैरों की सफाई की गई है। उसके बाद इलाज शुरू किया गया है। पार्षद कमलेश देवी व अन्य लोगों ने बताया कि गायत्री पढ़ी-लिखी है। खुद का परिवार नहीं है लेकिन, अलवर शहर में ही उसके भाई के परिवार की होने की सूचना है। कई सालों से महिला लावारिस ही घूमती थी। तीन-चार माह से उसके कीड़े पड़ गए। जिसके कारण खुद के घर में ही कैद हो गई। बाहर आना-जाना बंद हो गया था। आसपास के लोग ही खाना देते थे।