अपने ही बहू का ससुर ने कराया विवाह, निभाया पिता का फर्ज, जानिए क्या था ऐसा कारण...

अधिकतर समाचार पत्रों और टीवी न्यूज चैनल की खबरों में सुनने में आता है कि सास-ससुर ने बहु को दहेज प्रताड़ना में आग के हवाले कर दिया. या फिर बहू को कर रहे प्रताड़ित करने जैसी घटनाएं सुनने में मिलती रहती है. लेकिन गरियाबंद जिले के भेजीपदर गांव में सुसर ने समाज के लिए एक नई मिसाल पेश की है. अपनी विधवा बहू को बेटी की तरह रखकर रीति रिवाज से उसका पुनर्विवाह कराया है. सुसर के साथ अब पिता बनकर केशर राम सिन्हा ने बेटी के विवाह की सारी रस्मों को विदिवाधन से पूरा किया.
कलार समाज के केशरराम सिन्हा ने विधवा बहू का रीति रिवाज से विवाह करवाकर बेटी की तरह विदाई दी है.  बहू का 5 साल का एक बेटा भी है. हालांकि खबर का दूसरा पहलू यह है कि जिस व्यक्ति से केशर की बहू की शादी हुई है, उसकी पहली पत्नी लकवा के कारण बिस्तर पर रहती है तथा उसकी भी 12 साल की एक बेटी है. केशरराम सिन्हा की पांच साल पहले बेटे की मौत हो गई थी. समाजिक पदाधिकारियों की पहल ने उजड़ी जिंदगी में बहार ला दी है. बुधवार को भेजीपदर निवासी केसर सिन्हा ने अपने 30 वर्षीय विधवा बहू लक्ष्मी का विवाह कांकेर के सरोना निवासी चित्रसेन सिन्हा से सम्पन्न कराया है. विवाह हिन्दू रीति रिवाज से परिजन व पूरे सामाजिक लोगो की मौजूदगी में बड़े धूमधाम से सम्पन्न हुआ. 
बहू को ससुर केशर व उसकी सास ने बेटी की तरह विदाई दी है. इस मौके पर सभी की आंखों से आंसू छलक आए. शादी समारोह में शामिल हुए समाज प्रमुख पुनीत सिन्हा, तुलेश्वर सिन्हा, विजय, भोजराज, पूरन, दिलीप, खेमराज समेत लोगो ने उज्ज्वल भविष्य व मंगल कामना के लिए आशीर्वाद देकर खुशी व गमगीन माहौल के बीच विदाई दी. पुनर्विवाह के इस अनूठे पहल की प्रशंसा इलाके भर में हो रही है. समाज को  पदाधिकारियों ने इंसानियत का फर्ज निभाते हुए विधवा विवाह जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक प्रक्रिया को हरी झंडी देकर सामाजिक सरोकार की जिम्मेदारी को निभाया है.