पूरे खानदान का नामोनिशान मिटाने के तैयारी से आए थे सभी हत्यारे...

मौका-ए-वारदात का हाल और कत्ल को अंजाम देने का तरीका चीख-चीखकर गवाही दे रहा है कि कातिल पूरे परिवार को खत्म करने के इरादे से पहुंचे थे। घटनास्थल पर जुटे हजारों लोग इसी बात की चर्चा कर रहे थे। जिस तरह ईट-पत्थरों और घर में रखे सामानों को हथियार बनाकर लोगों को मौत के घाट उतारा गया उसे देख लोगों की चीख निकल गई। लोग बार-बार कह रहे थे कि वो जाने कौन हैवान थे, जिनका हाथ मासूमों का चेहरा देखकर भी नहीं कांपा।
विजयशंकर का छोटा बेटा मोनू गुजरात के सूरत में रहकर प्राइवेट जॉब करता है। उसकी फैमिली मेंबर्स भी उसके साथ थे। अगर मोनू और उसका परिवार घर पर होता तो वह भी हत्यारों की बदनीयती का शिकार हो जाता। ऐसे में यह भी तय था कि घर पर कोई चिराग जलाने वाला भी नहीं बचता। उधर जैसे ही मोनू को परिवार में इतने बड़े हादसे की खबर मिली, वह गांव के लिए रवाना हो गया। रिश्तेदार और गांव के लोग मोनू के आने के बाद ही मृतकों के अंतिम संस्कार की बात कर रहे थे।

छह भाइयों में तीसरे नंबर पर रहे विजय शंकर का परिवार आर्थिक रूप से काफी कमजोर था। बड़ा बेटा सोमदत्त उर्फ सोनू छोटे भाई मोनू के साथ मिलकर घर की माली हालत सुधारने के लिए दिन-रात मेहनत में जुटे हुए थे। सोमदत्त ने छह महीने पहले ही एक थ्री-व्हीलर फाइनेंस कराया था। यही थ्री-व्हीलर सोमदत्त की कमाई का जरिया था। पिछले कुछ दिनों से दोनों भाइयों की कमाई शुरू होने के बाद फैमिली में खुशियां आने लगी थीं। लेकिन न जाने कौन लोग थे, जिनसे इस परिवार की खुशियां बर्दाश्त नहीं हुई।