अब मिलने के लिए मत आना.. ये कहकर उसने अपने ही बेटे को लौटा दिया

बेतिया मंडल कारा में दो दिन पूर्व चप्पल चोरी को लेकर कैदियों के बीच विवाद हुआ था। विवाद इतना बढ़ा कि कारा के सुरक्षा कर्मियों को लाठी भांजनी पड़ी। लाठी भांजने के दौरान एक दो कैदियों को मामूली चोट भी आई थी। हालांकि इस घटना से सजायाफ्ता कैदी रघुनाथ राउत की मौत का कोई तालमेल नहीं है। लेकिन जेल प्रशासन के विरोध में रह रहे कतिपय कैदियों ने इसी को हवा देने की कोशिश की। कुछेक कैदियों को उकसा कर अनशन पर बैठ गए। 
बाद में जब कारा अधीक्षक ने हस्तक्षेप किया तो सबकुछ शांत हो गया। कारा अधीक्षक ने बताया कि मृतक कैदी बीते 29 नवंबर 2019 को जेल में आया था। उसकी अवस्था 80 वर्ष के आसपास थी। वह पहले से बीमार लग रहा था। वह किसी कैदी से बातचीत भी नहीं करता था। एक दिन पूर्व उसका बेटा मिलने के लिए आया था। उसने यह कह कर लौटा दिया कि अब मिलने के लिए मत आना। घर- परिवार देखो। मेरी तबीयत ठीक नहीं है।

जेल में काट रहा था आजीवन कारावास की सजा

वर्ष 2002 में भूमि विवाद में हुए एक हत्या के मामले में मंडलकारा में बंद सजायाफ्ता कैदी रघुनाथ राउत (80) की गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान मौत हो गई है। शिकारपुर थाना क्षेत्र के रोआरी नूनियाटोला निवासी रघुनाथ अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में बुधवार की रात्रि दम तोड़ दिया। 29 नवंबर 2019 से वह मंडलकारा में बंद था। 4 दिसंबर 2019 को कोर्ट से उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। 

मंडलकारा के डिप्टी सुपरिटेंडेंट संजय कुमार गुप्ता ने बताया कि रघुनाथ की तबीयत खराब होने पर 10 दिसंबर को उसे जेल के अस्पताल वार्ड में भर्ती कराया गया था। बुधवार की रात्रि साढ़े 10 बजे उसकी स्थिति खराब होने पर गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में भेजा गया था। जहां रात्रि 11:25 बजे उसकी मौत हो गई। सूचना मिलते ही पहुंचे बीडीओ कैदी की मौत के बाद गुरुवार की सुबह पुलिस व बेतिया बीडीओ बसंत कुमार सिंह अस्पताल पहुंचे। कागजी प्रक्रिया पूरी करने के बाद शव रघुनाथ के परिजनों के हवाले कर दिया गया। रघुनाथ के दो पुत्र और तीन पुत्रियां है। मौत की सूचना मिलते ही उसके घर में कोहराम मच गया है।