विवेकानन्द कहते थे कि पहले वो आपको कमजोर समझेंगे, फिर मजाक उड़ायेंगे और फिर आपके लिए अवरोध भी डालेंगे लेकिन आप चलते रहे सफल होना है. ऐसी ही कुछ कहानी है सीता देवी की जो अपने आप में एक मिसाल बन रही है. ये है दुवाकोटी नाम के गाँव में रहने वाली सीतादेवी जिनके खेत में भी पहले तो परम्परागत तरीके से ही खेती होती थी और वो ठीक ठाक पैसे कमा लेती थी लेकिन फिर मिली उन्हें नोलेज के आधार पर उन्होंने किवी की खेती करने का निर्णय लिया.
उद्यान योजना से उन्हें सहायता भी मिल ही सकती थी लेकिन लोगो ने सीता देवी का मजाक बनाना शुरू कर दिया और कहा कि खेती छोड़कर के ये सब क्या कर रही है? हालांकि इस पर सीता देवी ने इस पर बिलकुल भी ध्यान नही दिया और उनके पति राजेन्द्र सिंह ने भी इसमें उनका पूरा सहयोग दिया.

और प्रशासन भी जहाँ तक हो सकता तथा मदद कर ही रहा था जिसकी बदौलत सीता देवी ने एक साल के भीतर ही किवी का बड़ा ही प्यारा और सुन्दर सा बड़ा सा बगीचा खड़ा कर दिया जिसमे इस विदेशी धरती के फल की खेती होने लग रही है और इससे जाहिर तर पर परम्परागत खेती की तुलना में कई गुना ज्यादा कमाई भी होनी है और लोगो की अर्थव्यवस्था भी इसी से ही सुधरेगी.

अब वो किवी का उप्तादन करना शुरू कर चुकी है और उन्हें तो किवी क्वीन तक कहा जाने लगा है और तो और जिस गाँव में लोग उनका मजाक उड़ाते थे अब उसी गाँव में वो किवी के उत्पादन के लिए अपनी तरफ से प्रशिक्षण देने लगी है और लोग उनके प्रशिक्षण के आधार पर काम करते भी है. ये बताता है कि भारत में खेती अपने आप में बहुत ही ख़ास और जरूरी है जो सब कुछ बदलकर के रख देती है.