जोधपुर के प्रतापनगर थाना क्षेत्र के लाला लाजपत रॉय कॉलोनी में रहने वाले युवक ने पबजी गेम खेलने के बाद फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली। युवक पिछले चार माह से पबजी गेम का आदी हो गया था। परिजनों ने कई बार उसे गेम खेलने की आदत छुडवाई, लेकिन इसके बाद वह घरवालों के बाहर जाने पर गेम खेलता था। हादसे के समय युवक के पिता व उनके अन्य दो पुत्र घर के बाहर व मां पश्चिमी राजस्थान हस्तशिल्प मेले में गई हुई थी। प्रतापनगर पुलिस के अनुसार लाला लाजपत रॉय कॉलोनी में रहने वाले प्रेमप्रकाश मेघवाल ने रिपोर्ट दी कि वह रेलवे में सीनियर एलडीसी के पद पर कार्यरत है। रविवार दोपहर वह और उनके दो पुत्र शुभम व सूरज घर से बाहर गए हुए थे। उसकी पत्नी पश्चिमी राजस्थान हस्तशिल्प मेले में गई थी। पीछे उसका पुत्र चंद्र्रप्रकाश (21) घर पर अकेला था। वह मोबाइल पर पबजी गेम खेल रहा था।
इस दौरान उसने प्लास्टिक की रस्सी से फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली। उसकी पत्नी घर लौटी तो उन्हें खुदकुशी का पता लगा। इस पर वे उसे एमजीएच अस्पताल ले गए। जहां डॉक्टर ने जांच कर उसे मृत घोषित कर दिया। हादसे के बाद उसके मोबाइल देखने पर पता लगा कि वह पबजी गेम खेल रहा था। मृतक युवक के चाचा मधूसुदन मेघवाल ने बताया कि उसका भतीजा बीए द्वितीय वर्ष का छात्र था। वह गत चार माह से पबजी गेम का आदी हो गया था। दिन-रात मोबाइल गेम पर खेलने के कारण वह न तो समय पर खाना खाता था, न ही पढ़ाई। उसके स्वभाव में परिवर्तन होने पर उन्हें गेम की लत के बारे में पता लगा। इस पर परिजनों ने कई बार उसे मोबाइल पर पबजी गेम खेलने की आदत छुडवाई थी। इसके बाद वह परिजनों के घर से बाहर जाने के बाद मोबाइल पर गेम खेलता था। रविवार को भी उसके परिजन घर से बाहर गए, उस दौरान वह गेम खेल रहा था। इसके बाद उसने फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली।

पबजी गेम या अन्य कोई गेम भावनाओं को तीव्र कर देते हैं। ये नशे से भयावह है, क्योंकि व्यक्ति इसमें पूरी तरह से उलझ जाता है। पबजी गेम में गोलियां मारना सहित कई तरह के सिस्टम होते हैं। बच्चे इसमें पूरी तरह से डूब जाते हैं। पैरेंट्स बच्चों को मोबाइल देने की टाइम लिमिट रखें। जो भी बच्चे एप्प डाउनलोड करते हैं, उन पर नजर रखें। साथ ही समय-समय पर गेम को डिलीट करते रहे, ताकि बच्चे को उसकी लत न लग जाए। यदि पैरेंट्स को पता लग जाता है कि बच्चा एडिक्ट हो गया है तो उसकी काउंसलिंग शुरू कर दे। उसका बर्ताव देखते रहे। हालात अनियंत्रित होते ही मनोचिकित्सक के पास ले आएं, ताकि उसका उपचार किया जा सके।
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