10 माह के बच्चे को जिंक की जगह दे दिया नींद की दवा, 24 घंटे के बाद भी नहीं खोली आंख...

नागरिक अस्पताल की व्यवस्थाएं हैं कि सुधरने का नाम नहीं ले रही हैं। पिछले तीन-चार महीने में लापरवाही के कई बड़े मामले सामने आ चुके हैं। ताजा मामला कौशिक नगर निवासी निशांत का है। निशांत के दस माह के भतीजे को नागरिक अस्पताल के फार्मेसी स्टाफ ने चिकित्सक द्वारा लिखी हुई दवा बदलकर दे दी। बच्चे को जिंक की जगह नींद की दवा दे दी जिससे वह 24 घंटे बाद भी आंखें नहीं खोली हैं। हालांकि बच्चे की हालत अब ठीक बताई जा रही है। बच्चे के परिजनों का आरोप है कि इसकी शिकायत देने के लिए वह नागरिक अस्पताल गया था लेकिन सिविल सर्जन से मिलने नहीं दिया गया। 
दो घंटे इंतजार कर वह लौट आया। फिलहाल स्कीम नंबर 19 स्थित एक निजी अस्पताल में बच्चे का इलाज चल रहा है। 10 माह के पर्व के चाचा निशांत ने बताया कि गुरुवार को बुखार के चलते वे बच्चे को दिखाने नागरिक अस्पताल गए थे। यहां चिकित्सक ने पांच तरह की दवा लिखी। इनमें से एक दवा जिंक थी। परिवार ने आरोप लगाया कि फार्मेसी स्टाफ ने जिंक के स्थान पर ओलोंजापाइन दवा दे दी। यह दवा मरीज को नींद के लिए दी जाती है। बुधवार दोपहर बाद तीन बजे दी थी। इसके कुछ देर बाद ही पर्व सो गया। 

उन्हें हैरानी तब हुई, जब कुछ घंटे बाद भी बच्चा नहीं उठा। इस पर बच्चे को पास के ही एक निजी अस्पताल में ले गए तो चिकित्सक ने बताया कि जो दवा दी गई है वह नींद की है। इस पर शुक्रवार सुबह निशांत शिकायत लेकर नागरिक अस्पताल पहुंचा। नागरिक अस्पताल के एक चिकित्सक ने बताया कि बच्चे को दस एमजी की ओलोंजापाइन गोली दी गई है। बड़े व्यक्ति को भी यह आधी गोली दी जाती है। जो लोग ड्रग के आदी होते हैं, वे पूरी गोली लेते हैं। ऐसे में यह पूरी गोली दस माह के बच्चे के लिए बेहद खतरनाक हो सकती थी।
Loading...