उस जुर्म की सजा काटी जो किया ही नहीं, 4 महीने बाद आया बाहर तो पत्‍नी को देखकर छलकी आंखें...

68 साल के हुसना उस जुर्म की सजा काटकर बुधवार देर शाम केंद्रीय जेल से बाहर आ गए जो उन्होंने कभी किया ही नहीं था। जेल के दरवाजे पर पत्नी व अन्य परिजन बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। उन्हें देखते ही हुसना की आंखें छलक पड़ीं। चार माह से जेल में बंद हुसना ने इस जन्म में रिहा होने की उम्मीद ही छोड़ दी थी। जेल से बाहर आने पर उन्हें न्याय व्यवस्था और वकीलों का शुक्रिया कहने को शब्द नहीं सूझ रहे थे। पत्नी धावलीबाई इस बात से जरूर आक्रोशित थीं कि पुलिस की लापरवाही के चलते इस उम्र में ये दिन देखने पड़े। 
वे आज भी उस दिन को याद कर सिहर उठती हैं, जब पुलिस ने उनके पति को बेवजह गिरफ्तार किया था। हाई कोर्ट के आदेश के बाद बुधवार देर शाम हुसना पिता रामसिंह को केंद्रीय जेल से रिहा कर दिया गया। 18 अक्टूबर 2019 को पुलिस ने उन्हें उस हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया था, जो उन्होंने कभी किया ही नहीं था। उन पर आरोप था कि उन्होंने हत्या की थी और सेशन कोर्ट ने उन्हें प्रकरण क्रमांक 41/76 में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। पेरोल पर बाहर आने के बाद वह वापस ही नहीं आए। 

कोर्ट ने हुसना को जेल भेज दिया था। इसके बाद से वह जेल में थे। इस बीच उसके बेटे ने हाई कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर सच्चाई कोर्ट के सामने रखी। कोर्ट के आदेश पर प्रमुख सचिव (गृह) ने मामले की जांच की तो पता चला कि हत्या करने वाले और जेल में बंद हुसना अलग-अलग हैं। इस पर कोर्ट ने शासन पर पांच लाख रुपए हर्जाना लगाते हुए हुसना को रिहा करने के आदेश दिए। कोर्ट के आदेश के बाद बुधवार शाम हुसना को रिहा कर दिया गया।
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