लोक अदालत में बिछडे हुए परिवार का हो गया मिलन

शनिवार को आयोजित लोक अदालत में पिछले एक साल से अलग-अलग रह रहे, पिता पुत्र व भाभी का मिलन हुआ। न्यायालय में एक दूसरे से गले मिलकर गिले शिकवे दूर हुए। किरण पंवार पिता भोलाराम पंवार निवासी कालाखेत का पारीवारिक विवाद पिता व भाभी व भाईयों से चल रहा था। सैलानी अब्दुल कादर मंसुरी के पास पीएलवी लेकर आए व उनके माध्यम से नि:शुल्क में घरेलु हिंसा का एक प्रकरण दायर किया। इसमें पिता व भाभी व भाईयों को नोटिस जारी हुए तो वह न्यायालय में उपस्थित हुए। 
जवाब के बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट मंजूसिंह एवं सैलानी एवं अब्दुल रशीद मंसुरी व अब्दुल कादर मंसूरी व शंकर डोडीया एडव्होकेट ने पिता पुत्र व भाभी व भाईयों को समझाईश दी तो यह लोग समझ गए और पिता ने अपनी पुत्री को 3 हजार रपए हर माह भरण पोषण के रूप में दिया व प्रथम चेक न्यायालय के समक्ष किरण को दिया व मकान में रहने का अधिकार व मकान के हक अधिकार के संबंध में भी लिखकर दिया। इस प्रकार आपस में पिता पुत्री व भाईयों का विवाद खत्म हुआ और न्यायालय में ही सभी एक साथ खुशी से अपने घर गए।

लोक अदालत के दौरान एक अन्य मामले में बिछड़े दंपत्ति को भी समझाईश के बाद मिलाया। न्यायालय में एक दूसरे से गले मिलकर गिले शिकवे दूर हुए। प्रेमलता पति रामेश्वर मीणा निवासी बुगलिया का विवाह रामनिवास निवासी मांगरोल के साथ हुआ था। दोनों के बीच डेढ साल पहले पारिवारीक विवाद होकर मनमुटाव बढ़ गया और गर्भवस्था में प्रेमलता को निकाल दिया था जो अपने माता-पिता के यहां आई। प्रेमलता अपने अभिभाषक सैलानी अब्दुल कादर मंसुरी से संपर्क किया। 

इसके द्वारा घरेलु हिंसा के मामला लगाया गया। इसका नोटिस रामनिवास को प्राप्त हुआ जो न्यायालय में पहुंचे। कुछ समय बाद सहमति की बात हुई। प्रधान न्यायाधीश लखनलाल गर्ग एवं न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी मंजूसिंह एवं सैलानी अब्दुल रशीद व अब्दुल कादर मंसूरी एवं विष्णु शर्मा ने समझाईश के बाद पति-पत्नी को मिलाया। इसके बाद दोनों ने एक दूसरे को माला पहनाई, मिठाई खिलाई व नवजात के साथ खुशी-खुशी घर गए। दोनों के बीच डेढ़ साल से विवाद इतना लंबा चला कि पिता ने अपने पुत्र का डेढ़ साल बाद मुंह देखा।
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