फौजी पति ने पत्नी के मायके जाने पर मांगा तलाक, न्यायाधीश ने करवा दिया समझौता

देवास जिला न्यायालय में हुई लोक अदालत कई परिवारों के लिए खुशियां लेकर आई। आपसी मनमुटावों को भूलकर कई जोड़े एक हुए और हंसी-खुशी साथ-साथ न्यायालय से घर के लिए रवाना हुए। पारिवारिक विवादों के बाद दो बच्चियों सहित मायके चली जाने वाली पत्नी को तलाक देने के लिए एक फौजी पति ने कोर्ट में तलाक का आवेदन लगाया था। न्यायाधीश व सदस्यों की समझाइश के बाद दोनों बच्चों के भविष्य को देखते हुए साथ रहने के लिए राजी हो गए और सभी गिले-शिकवे भूलकर एक-दूसरे को पुष्पमाला पहनाई और साथ-साथ रवाना हुए। 
टोंकखुर्दक्षेत्र के कराडिय़ा पाड़ल्या में रहने वाले निलेश पिता विक्रमसिंह पटेल का विवाह करीब 8 साल पहले पिपल्दा (इंदौर) की कोमल मंडलोई के साथ हुआ था। बाद में इनके बीच पारिवारिक बातों को लेकर मनमुटाव हो गया। पिछले साल कोमल अपनी दो बेटियों अनमोल (8) व कशिश (7) को लेकर अपने मायके चली गई। पति निलेश ने मनाने और ससुराल वापस लाने के प्रयास किए लेकिन बात नहीं बनी। परेशान होकर करीब छह-सात माह पहले निलेश ने जिला न्यायालय में तलाक का आवेदन वकील संजय शर्मा के माध्यम से लगाया। 

मामला जब कुटुंब न्यायालय में पहुंचा तो न्यायाधीश मो. सैयदुल अबरार ने दोनों में सुलह कराने के प्रयास शुरू किए। दो से तीन बार दोनों से बात की गई और उनकी मनोस्थिति जानी गई।आखिरकार शनिवार को दोनों साथ-साथ रहने को राजी हो गए। कुटुंब न्यायालय के सदस्यों एडवोकेट राजेश गुप्ता, अवधेश श्रीवास्तव ने भी समझौता करवाने में सहयोग किया। 

शनिवार को दोपहर करीब एक बजे न्यायाधीश व सदस्यों ने निलेश व कोमल को एक-दूसरे से पुष्पमाला पहनवाई और समझौता पूर्णकरवाया। इस अवसर पर मौजूद स्टॉफ ने तालियां बजाकर उनका हौसला बढ़ाया। दोनों ने न्यायाधीश के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया और घर के लिए रवाना हो गए। निलेश वर्तमान में 126 लाइट आर्मी एयर डिफेंस जोधपुर में पदस्थ हैं। कुटुंब न्यायालय में कुल 7 प्रकरणों का निराकरण हुआ, कुछ में समझौते हुए तो कुछ में भरण-पोषण की राशि देने पर सहमति बनी।
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