वैलेंटाइन वीक में बढ़ जाती है भाभी की 'डोज' का डिमांड, यंग ब्रिगेड है दीवाना...

वैलेंटाइन वीक की शुरुआत शुक्रवार से हो गई है। इस दौरान प्यार के कई नए पौध जन्म लेने लगे हैं। साथ ही वैलेंटाइन वीक में होटलों और रेस्टोरेंट में पार्टियों का दौर भी शुरू हो जाता है। इन पार्टियों में आपको ज्यादातक यंग ब्रिगेड ही नजर आते हैं। जिसमें यूथ और यंग गर्ल्स होती हैं। रईस युवाओं की पार्टियों में मुंबई से आने वाली भाभी की डोज का डिमांड बढ़ जाता है। अपने धंधे में कथित रूप से भाभी के नाम से मशहूर महिला रहती तो मुंबई में है। लेकिन इसके डोज की डिमांड देश के कई शहरों में हैं। 
ऐसे में भाभी खुद ही लोगों तक इस डोज की डिलीवरी करने जाती हैं। शुक्रवार को मुंबई से ट्रेन में लेकर चलीं और शुक्रवार को भोपाल स्थित हबीबगंज स्टेशन पर उतरी। ट्रेन से उतरते ही पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। पिंक जैकेट में पुलिस गिरफ्त में खड़ी महिला का नाम रेहाना खान है। 45 साल की रेहाना महाराष्ट्र की रहने वाली है। पति का नाम सलीम खान है, कुछ साल पहले पति की मौत हो गई है। महिला से पहले पति ही विभिन्न शहरों में घुमकर ऐसे ही ड्रग्स की सप्लाई करता था। पति की मौत के बाद यह काम पत्नी करने लगी थी। डिमांड के अनुसार वह माल लेकर खुद ही विभिन्न शहरों में जाती थी।

महिला के पास से करीब 13 ग्राम ड्रग पुलिस ने जब्त की है। इस ड्रग की कीमत बाजार में करीब 13 लाख रुपये हैं। वह माल की डिलीवरी से पहले ही पार्टी से पेमेंट ले लेती थी। उसके बाद ही मुंबई से निकलती थी। इस ड्रग को एमडीएमए के नाम से जाते हैं। युवाओं के बीच में यह काफी लोकप्रिय है। इसकी डिमांड काफी है। एक डोज इसकी एक से पंद्रह हजार रुपये तक की पड़ती है। इसलिए रईसजादे ही इसके शौकीन होते हैं।

महिला जो ड्रग लेकर भोपाल पहुंची थी, उसे हिंदुस्तान में एमडीएमए के नाम से जानते हैं। लेकिन अमेरिका में इसे लव पिल कहा जाता है। साथ ही अमेरिका में इसे एक्स्टसी ड्रग भी लोग बोलते हैं। मगर पार्टियों में यह 'लव पिल' के नाम से ही मशहूर है। कहा जाता है कि यह रंग और ध्वनि पर इंसान में सेंसेशन बढ़ा देता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ऑन ड्रग यूज एंड हेल्थ के मुताबिक अमेरिका में बारह साल और उससे अधिक उम्र के लोग एक बार इस ड्रग का इस्तेमाल जरूर करते हैं। वहां भी एसे एमडीएमए कहा जाता है।

एमडीएमए का सबसे अधइक सेवन करने वाले युवा हैं। युवाओं को ही ड्रग तस्कर निशाना बनाते हैं। इसके लिए वह कॉलेज, हॉस्टल में अपने-अपने लोगों को रख देते हैं। जो इन जगहों पर ड्रग की बिक्री करते हैं। एएसपी निश्चल झारिया ने कहा कि ब्राउन शुगर की जगह एमडीएमए का सेवन अधिक किया जाता है। यह दो सप्ताह पहले भी भोपाल आई थई। लेकिन पुलिस की पकड़ में नहीं आई थी।

Source : patrika
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